चुनाव आयोग की शाख आज सबसे नीचले स्तर पर

हाल के आम चुनाव में जिस तरह से चुनाव आयोग एक खास राजनैतिक पार्टी के साथ अप्रत्यक्ष रूप खड़े नज़र आया है. चुनाव आयोग के मुख्या अधिकारी का यह बर्ताव पुरे चुनाव प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिया है. चुनाव आयोग का मुख्य आयुक्त प्रधान सेवक का निजी सेवक के रूप में नज़र आये. हालाँकि ये भी सच्चाई है के वर्तमान मुख्या चुनाव आयुक्त मोदी जी का निजी सहायक रह चुके हैं. मोदी जी और उनके पार्टी नेताओं के ऊपर चुनाव प्रचार के दौरान किसी प्रकार के भी करवाई नहीं करना और विपक्ष के नेताओं पर छोटी से छोटी गलती पर फ़ौरन एक्शन लेना, ये मुख्य आयुक्त की जैसे नियम बन गया था.

वोटर लिस्ट से नाम गायब होना

इसमें तो यही कहना काफी है जिसको चुनाव आयोग ने इलेक्शन अम्बस्सडोर बनाया था उसी का नाम वोटर लिस्ट से गायब था. बताया जा रहा है कि करोडो के तादाद में दलित, मुसलमानो और कुछ सेक्युलर हिन्दुओं का नाम वोटर लिस्ट में नहीं हैं!

तेजप्रताप बहादुर का परचा खारिज करना

बनारस से लोकसभा के लिए सपा के उम्मीदवार तेजप्रताप का परचा खारिज करना भी आयोग की भूमिका को संदेहास्पद बनाता है. गुजरात के पटेल समाज के उभरता हुआ युवा नेता हार्दिक पटेल का भी परचा रिजेक्शन भी शक घेरे में है.

चुनाव आयोग के वेबसाइट पर वोटिंग परसेंट बदल जाना

ओडिशा और बंगाल के चुनाव के वोटिंग परसेंट चुनाव के कुछ दिन बाद अचानक से वेबसाइट में बदल गया था. वोटिंग परसेंट बढ़ा कर दिखाया जाने लगा था. इस आरोप पर चुनाव आयोग कोई जवाब नहीं दिया है अबतक.

बीस लाख ईवीएम गायब होने की मसला

एक RTI से यह खुलासा हुआ की ईवीएम बनाने वाले देश को दो सरकारी संस्थानों जितना ईवीएम बनाया और जितना कि चुनाव आयोग ने लिया है, उसमे लगभग बीस लाख ईवीएम का आता पता नहीं मिला है. तो सवाल उठता है कि ये बीस लाख ईवीएम को किसने लिया और क्यों लिए…सबसे बड़ी सवाल कि आज तक इस समबन्ध में FIR क्यों नहीं हुआ है.

चुनाव के बाद ईवीएम से भरी वाहन का पकड़े जाना

चुनाव के फ़ौरन बाद ईवीएम से भरी वाहनों का यहां वहां स्ट्रॉंग रूम के आस पास पकडे जाने कि घटना भी चुनाव आयोग की भूमिका को शक के घेरे में खड़े कर देती है. सवाल ये भी उठता है कि क्या ये ईवीएम वहीँ बीस लाख मिसिंग ईवीएम तो नहीं हैं जिसको बदल कर चुनाव नतीजे बदला कि कोशिश हो रही है?

ईवीएम को हैक किया जा सकने पर विवाद

देश विदेश के कई जानकारों ने भारत के ईवीएम की टेक्निकल रूप से कमज़ोर होने का दावा किया है. आम आदमी पार्टी के एक नेता ने तो असेंबली के अंदर ईवीएम को हैक करके दिखाया था. वहीं लंदन में आयोजित एक समारोह में जिसमे मोदी जी के एक केंद्रीय नेता भी थे, में सय्यद शुज़ा ने ईवीएम हैक करने का प्रमाण दिया था. सय्यद शुज़ा ने तो मोदीजी पर 2014 का आम चुनाव भी ईवीएम हैक करके जीतने का आरोप लगाया था.

बैलट पेपर से चुनाव कराने कि मांग किया

एक दो पार्टी को छोड़कर लगभग सभी पार्टियों ने बैलट पेपर से चुनाव कराने कि मांग किया था. इसको भी चुनाव आयुक्त बिना ठोस कारण बताये ही सिरे से खारिज कर दिया था. ये भी जान ले कि वर्तमान चुनाव आयुक्त EVM बनाने वाले कंपनी के डायरेक्टर भी रह चुके हैं. ये भी गौरतलब है कि संसार के (लगभग) कोई देश भी EVM का इस्तेमाल नहीं होता है. यहां तक जापान जो EVM के निर्माण के लिए पुर्जे बनाता है वो भी EVM का इस्तेमाल नहीं करता है. आखिर कोई तो वजह होगा जो विश्व के कोई भी महत्वपूर्ण लोकतंत्र EVM का इस्तेमाल नहीं करता है?

VVPAT को पहले वेरीफाई करने का मुद्दा

ईवीएम से वोट गिनती के एक दिन पहले लगभग बाइस पार्टी के प्रतिनिधि चुनाव आयोग से मिलाकर VVPAT को ईवीएम से पहले वेरीफाई करने कि गुज़ारिश किया था. इसको भी चुनाव आयोग ने बिना कोई ठोस कारन के ठुकरा दिया था.

राहुल गाँधी के वायनाड मे मिले वोट में फ़र्क़

सहजाद बरनी के शो के हवाले से ये पता चला है कि शाम चार बजे गाँधी को लगभग तरह लाख वोट मिले थे वहीँ जब जीते तो गाँधी को केवल सात लाख वोट ही मिले. तो फिर लगभग छह लाख वोट कहाँ गए?
यहां यह विदित हो कि चुनाव आयोग पर सवाल उठाये जा रहें हैं. हाल के दिनों में चुनाव आयुक्त के क़दम पर सवाल उठा जा रहें हैं. एक कामयब लोकतंत्र में नागरिको का चुनाव पर भरोसा होना बहुत ज़रूरी है. इसी भरोसे को क़ायम रखने के लिए सवाल उठाया जा रहा है.

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