मंत्री रवि शंकर के बयान काफी बचकाना है…कपिल सिब्बल

सरकार को आरोप प्रत्यारोप करने के बजाय इन सवालो कि तह तक जांचने की कोशिश करनी चाहिए.

मंत्री जी के बयान काफी बचकाना है…कपिल सिब्बल
मोदी कैबिनेट में आईटी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने हास्यपद तर्क दिया है. इन्होने EVM हैकिंग दावा में चुनाव आयोग के बचाव करते हुए कहा कि वह पिछले साढ़े चार साल आईटी डिपार्मेंट के हेड हैं. अगर सैय्यद शुजा कोई हैकर होते तो थे उनको जरूर मालूम होता. अब इन मंत्री महोदय ये कौन बताये कि कोई भी हैकर अपना परिचय खुलेआम ज़ाहिर नहीं करता है. बल्कि उल्टा किसी हैकर का अगर कवर खुल जाए…पोल खुल जाए तो उस हैकर को जान के लाले पढ़ जाते हैं. स्नोडेन का मामला जगज़ाहिर है. ये सभी जानते हैं कि स्नोडेन को अपनी जान बचाने को लिए बहुत दिनों से रूस के एम्बेसी में शरण लिए हैं.
दूसरा तर्क है कि ये सब किया धरा कांग्रेस का है…
ये भी ग़लत है क्योंकि शुजा ने खुद कांग्रेस को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है. इस से उल्टा सरकार क्यों न शुजा के दावे को ही बारीकी से जांचबीन करती है. शुजा ने जो आरोप लगाए हैं वो काफी गंभीर हैं..

  1. 2014 में इलेक्शन एवं हैक हुए थे…क्या ये सही है?
  2. शुजा और उनके टीम हैकर के ग्रुप में थे…क्या वाक़ई ऐसा था?
  3. शुजा के साथियो का खून किया गया था….क्या वाक़ई ऐसा हुआ था?
  4. शुजा अमेरिका में राजनेटिक शरण लिए था…क्या वाक़ई ऐसा हुआ था?
  5. पत्रकार गौरी लंकेश का खून एवं के कारन हुआ था…क्या वाक़ई ऐसा हुआ था?
  6. मोदी कैबिनेट में मंत्री गोपीनाथ मुंडे का खून एवं से जुड़ा हुआ था….क्या वाक़ई ऐसा है?

सरकार को आरोप प्रत्यारोप करने के बजाय इन सवालो कि तह तक जांचने की कोशिश करनी चाहिए.


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