क्या एक छोटा बच्चा भी EVM को हैक कर सकता है?

आप भी जानियेः ईवीएम को हैक करने के दो सबसे आसान तरीक़े- 'आप' से मान्यता प्राप्त

ईवीएम को हैक करते ‘आप’ विधायक

झुमरीतिलैया. वे लोग या तो मूर्ख हैं, या उन्हें आयकर विभाग से नोटिस आया है, जो कहते हैं कि EVM को हैक नहीं किया जा सकता। EVM हैक करना उतना ही आसान है, जितना Windows-10 को अपडेट होने से रोकना! वैसे तो, केजरीवाल जी के मुताबिक़ दुनिया में ईवीएम हैक करने के अनगिनत तरीक़े हैं। लेकिन हम यहाँ पर सिर्फ दो तरीकों की चर्चा करेंगे, जो देखने में सबसे आसान लगते हैं-

EVM हैक करने का पहला तरीका: ये पहला और सबसे आसान तरीका है। 2014 में आम चुनाव के दौरान देश में लगभग 990 स्ट्रांग रूम बनाए गए थे, जिनकी जिम्मेदारी जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) को सौंपी गई थी। एक राजपत्रित और एक पुलिस का बड़ा अधिकारी भी 24×7 स्ट्रांग रूम की जिम्मेदारी संभालता है। इसके अलावा 24 जवान केन्द्रीय पुलिस बल के तथा 50 जवान राज्य पुलिस के, 24 घंटे स्ट्रांग रूम में तैनात रहते हैं। कुल मिलाकर कम से कम 77 लोग स्ट्रांग रूम की सुरक्षा में लगे होते हैं।

सबसे पहले तो आप उस स्ट्रांग रूम के इंचार्ज (DEO) को 1 करोड़ रुपये पकड़ा दीजिए (वैसे आजकल मार्केट रेट दो करोड़ रु. चल रहा है), फिर छोटे स्तर के अधिकारी को 50 लाख और सुरक्षा में लगे सभी जवानों को कम से कम 5-5 लाख रुपए तो देने ही पड़ेंगे। अतः एक स्ट्रांग रूम लूटने का कुल खर्च बैठता है लगभग 5,70,00,000 रुपये! इन सबको घूस देने के बाद ही आप स्ट्रांग रूम में घुस पाएँगे।

अब जरूरत पड़ेगी EVM को हैक करने के लिए इंजीनियरों की! तो हमारे देश में बेरोज़गार इंजीनियर्स की कोई कमी तो है नहीं! इन्हीं में से दस इंजीनियर उठा लाइए और EVM का मदरबोर्ड चेंज करने के लिए उस रूम में ठूंस दीजिए। ये दस इंजीनियर एक घंटे में ही सभी मशीनों के मदरबोर्ड चेंज कर देंगे। यहाँ पर एक प्रश्न खड़ा होता है कि EVM में लगाने के लिए नया मदरबोर्ड लाएंगे कहा से? तो इसका जवाब है- जग्गू कबाड़ी वाला! शहर के मशहूर कबाड़ी की दुकान। मदरबोर्ड चेंज करते ही, सभी इंजीनियर स्ट्रांग रूम से बाहर आ जाएँगे और किसी को पता भी नहीं चलेगा कि EVM को हैक किया जा चुका है।

टीप: यह पूरा काम बड़ी सावधानी से करना होगा, ताकि किसी को पता ना चले कि मशीनों का मदरबोर्ड रातों-रात बदल दिया गया है। इसके आलावा जिन्होंने भी EVM को हैक करने में सहायता की है (लगभग 90 लोग), उन्हें नज़दीक के किसी मंदिर में ले जाकर कसम भी दिलाना पड़ेगा कि वे किसी को नहीं बताएंगे कि यहाँ क्या हुआ है। बस! इतना छोटा सा काम अगर आपने कम से कम 500 काउंटिंग सेंटर्स में कर दिया, तो देश में सरकार आपकी ही बनेगी। कुल खर्च आएगा, यही कोई 28 अरब 50 करोड़ रुपए। सनद रहे कि इस खर्च में इंजीनियरों और जग्गू कबाड़ी वाले का खर्च नहीं जोड़ा गया है। वैसे भी, इंजीनियर कितने रुपए लेंगे ये तो आपको मालूम ही है।

ईवीएम को हैक करते

EVM हैक करने का दूसरा तरीका: यह तरीका थोड़ा जोखिम भरा है और इसके लिए कुछ सामग्री भी इकठ्ठा करनी पड़ेगी। एक स्ट्रांग रूम पर कब्ज़ा करने के लिए आवश्यक सामग्री- 200 खूंखार गुंडे, 200 राइफलें, 10 सस्ते इंजीनियर, खाने-पीने का सामान और पानी बोतलें।

सबसे पहले लगभग 200 खूंखार गुंडे, हथियार लेकर स्ट्रांग रूम पर हमला करेंगे और सुरक्षा में तैनात जवानों को बेहोश कर देंगे। बिल्डिंग पर कब्ज़ा करने के बाद, सस्ते इंजीनियर तुरंत मदरबोर्ड बदलने का काम पूरा कर देंगे। इंजीनियरों का काम ख़त्म होते ही, उन जवानों को फिर से होश में लाना पड़ेगा, जिन्हें बेहोश किया गया था, वरना यह सबको पता चल जाएगा कि इस बिल्डिंग पर किसी ने हमला किया है। तो, जवानों को होश में लाकर वापस लौट आइए। अगर आपने यह काम काउंटिंग से एक दिन पहले देश में लगभग 500 जगहों पर कर दिया तो दिल्ली में सरकार बनाने से आपको कोई नहीं रोक सकता। चलिए अब मिठाई खिलाइए!

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