ईवीएम में 110 परसेंट घपला हुआ है …पढ़ें रिपोर्ट

2019 के लोकसभा चुनावों के बाद अगर भारत में समस्याएं पैदा होती हैं तो उसका असल ज़िम्मेदार चुनाव आयोग होगा. अगर देश में अराजकता, मोबलिन्चिग, दंगे, फसाद, बेकसूरों की हत्याऐं होती हैं तो चुनाव आयोग ज़िम्मेदार होगा.

क्या है मामला?

भारत के हर चुनावों में ईवीएम का मुद्दा हर बार उछाला जाता है. अब जनता भी ये तय नहीं कर पा रही है कि चुनाव सही और ईमानदारी से होते हैं. आज के समय में अधिकतर लोग ईवीएम में गड़बड़ी मान कर चलते हैं. क्या सच है ये अब किसी तरह से इस्पष्ट नहीं हो सकता है. जबतक कि चुनावों से ईवीएम को हटा नहीं दिया जाता है. ईवीएम को लेकर जनता में चिंता हो भी क्यों न. चुनाव आयोग की भूमिका इस संदेह को और/बहुत मज़बूत कर देती है कि ईवीएम के ज़रिये बड़ा होता होता है.

चुनाव आयोग की भूमिका काफी संदेहास्पद

जबसे 20 लाख ईवीएम मशीनों के ग़ायब होने की बात/कहानी सामने आयी है तब से चुनावों में होने वाले घोटाले पर जनता की यकीन हो चला है. चुनाव आयोग स्पष्ट करें, वो 20 लाख ग़ायब ईवीएम कहाँ हैं? किसके पास हैं? उन्हें ज़मीन कहा गयी या आसमान निगल गया? कहीं इन्हें मशीनों को तो चालाकी से चुनावों में अदलाबदली कर नतीजे आते हैं?

कई बार चुनावों में ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी की खबरें आयी हैं. कितने ही वीडियो सोशल मीडिया में आते रहे हैं क्या उनमे से किसी की जांच कि गयी. अगर नहीं तो फिर जनता क्या सोचे?

मोदीजी के हेलीकाप्टर से मिले ब्लैक बॉक्स का रहस्य बरक़रार

मोदी के हेलीकाप्टर से काले रंग के बॉक्स
मोदी के हेलीकाप्टर से काले रंग के बॉक्स

चुनावों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के हेलीकाप्टर से काले रंग के बॉक्स निकाले जाने की तस्वीरें/वीडियो मीडिया के ज़रिये सामने आयी थीं. उस मामले में चुनाव आयोग ने क्या जांच की और उन बॉक्सेस में था क्या ये अभी तक क्यों नहीं बताया गया? तो क्या माना जाए कि बड़े नेताओं के ज़रिये किये जाने वाले बड़े घोटालों की जांच/कार्यवाही करने की हिम्मत चुनाव आयोग की नहीं है?

भारतीय सेना या मोदी सेना

पूरे चुनावों में प्रधानमंत्री मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नक़वी ने भारतीय सेना को ”मोदी की सेना” बताया. चुनाव आयोग ने किसी भी कोई कार्यवाही क्यों नहीं की? चुनाव आयोग भारत सरकार की एक स्वतंत्र संस्था है वो सरकार का मत्रालय तो है नहीं. फिर चुनाव आयोग ने स्वतंत्रता के साथ कार्यवाही क्यों नहीं की, तो जनता क्यों न ये समझे की कुछ तो गड़बड़ है.

चुनाव आयोग के कर्मचारी हों या सरकार के मंत्री, सांसद, प्रधानमंत्री सभी जनता के पैसों से अपना वेतन व् अन्य सुख सुविधाएं, सुरक्षा पाते हैं. जनता के भले के लिए काम करना इनकी संवैधानिक ज़िम्मेदारी है. क्या चुनाव आयोग ने संवैधानिक ज़िम्मेदारियों को निभाया और जब जनता चाहती है कि चुनाव ईवीएम से न होकर पेपर बेलोट से कराये जाएँ तो इस पर आयोग को क्या समस्या है. जो भी हर्जा खर्चा चुनावों में होता है वो आयोग अपनी जेब से तो नहीं करता है ये भी सब जनता का होता है.

तो चुनाव आयोग ज़िम्मेदार होगा

2019 के लोकसभा चुनावों के बाद अगर भारत में समस्याएं पैदा होती हैं तो उसका असल ज़िम्मेदार चुनाव आयोग होगा. अगर देश में अराजकता, मोबलिन्चिग, दंगे, फसाद, बेकसूरों की हत्याऐं होती हैं तो चुनाव आयोग ज़िम्मेदार होगा. अगर देश में हिन्दू राष्ट्र की घोषणा होती है तो चुनाव आयोग ज़िम्मेदार होगा. अगर मंदिर बनाने के लिए कानून तोडा जाता है तो ज़िम्मेदार चुनाव आयोग होगा.

वैसे अब विपक्षी दलों का काम और ज़िम्मेदारियाँ पहले से अधिक बढ़ गयी हैं. संसद में जाना इनको नहीं नसीब हुआ मगर बड़ी संसद जनता इनके साथ है उसके पास जाएँ, सड़कें मौजूद हैं, उनको घेरें, घरों में बैठने का समय नहीं है….कहीं साक्षी माहराज की बात सत्य होगी तो फिर इस देश में चुनाव नहीं होंगे….परवेज़ ख़ान

SP प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव ने चुनाव परिणाम पर आपत्ति दर्ज कराई

चुनाव परिणाम पर प्रत्याशियों ने आशंका जाहिर करना शुरू कर दिया है. समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव ने चुनाव परिणाम पर आपत्ति दर्ज कराई है. धर्मेंद्र यादव बदायूं लोकसभा सीट से एसपी के उम्मीदवार हैं. उनका कहना है कि आखिरी गिनती के दौरान करीब 8 हजार अतिरिक्त वोटों को गिना गया है. धर्मेंद्र यादव ने संबंध में जिलाधिकारी के समक्ष लिखित शिकायत देते हुए स्पष्टीकरण मांगा है. वो अगर जिलाधिकारी की बातों से संतुष्ट नहीं होते तो बदायूं लोकसभा चुनाव परिणाम को वह कोर्ट में चुनौती भी दे सकते हैं.

मीडिया से बातचीत में धर्मेंद्र यादव ने कहा. ‘मेरी आपत्ति बिल्सी विधानसभा सीट पर हुई मतगणना को लेकर है. वोटिंग होने के बाद जो रिकॉर्ड मुझे उपलब्ध कराया गया था उन आंकड़ों के मुताबिक 1,88,248 वोट पड़े थे. सबसे कम वोट बिल्सी में ही पड़े थे. लास्ट राउंड की गिनती के बाद जो आंकड़े आए हैं. उनमें उस सीट पर 1,96,110 वोट पाए गए. इस तरह फाइनल गिनती में इस सीट पर करीब 8 हजार वोट ज्‍यादा पड़ गए हैं.’

उन्होंने कहा कि इस मामले में सबूत जिलाधिकारी को सौंप दिए गए हैं. धर्मेंद्र यादव ने जिलाधिकारी से स्पष्टीकरण देने की मांग की है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि बिल्सी विधानसभा में ही करीब 8 हजार वोट कहां से ज्यादा आ गए? एसपी नेता ने कहा कि सहसवान में हम जीत रहे थे. इसलिए वहां गड़बड़ी नहीं हुई.

धर्मेंद्र यादव ने कहा कि अगर वो जिलाधिकारी के जबाव से संतुष्ट नहीं हुए तो वो कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं. धर्मेंद्र यादव ने एग्जिट पोल पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि एग्जिट पोल के मुताबिक ही नतीजे कैसे आए? अभी मैं ईवीएम को लेकर कुछ नहीं बोलूंगा. वरना लोग कहेंगे हार के बाद ऐसा कहा जा रहा है.

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