अयोध्या में वोट के आकड़े में बहुत फ़र्क़ पाया गया है, दुबारा VVPAT की गिनती होगी

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से जुड़े विवाद थमने का नाम ही ले रहा है. रोज़ रोज़ नया खुलासा हो रहा है. कहीं वोट का आकड़ा गलत पाया जा रहा है तो कहीं ईवीएम ही गायब हो जा रहे हैं. अब अयोध्या में ईवीएम में वोट ज्यादा पड़ गए. पड़ताल में इसका खुलासा हुआ तो प्रशासन में हड़कंप मच गया. एक नहीं बल्कि अयोध्या के तीन और गोसाईगंज विधानसभा क्षेत्र के एक बूथ में यह गड़बड़झाला सामने आया है. अब चुनाव आयोग ने तय किया है कि इन बूथों की ईवीएम में पड़े वोटों का मिलान वीवीपैट की पर्ची से कराया जाएगा.
जिले में छह मई को मतदान संपन्न हो गया. इसके बाद ईवीएम में डाले गए वोटों का अभिलेखों से मिलान किया गया तो, बड़ी चूक सामने आई. यह चूक जिले के अयोध्या विधानसभा क्षेत्र में तीन बूथ, बूथ संख्या-31, 346 और 370 और गोसाईगंज विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या 182 में सामने आई.
इन बूथों में वोट डालते समय मतदाता सूची में लगाए गए टिक से ईवीएम में पड़े वोटों की संख्या में अंतर मिला. पता चला कि वास्तव में जितने वोट मतदाता सूची के मुताबिक डाले गए थे, उससे अधिक वोट ईवीएम बता रही है. यह खबर प्रशासन के उच्च अधिकारियों को लगी तो हड़कंप मच गया.

गहराई से छानबीन के बाद इसका खुलासा हुआ तो इन बूथों पर तैनात पीठासीन अधिकारियों की बड़ी चूक सामने आई. यह चूक बूथ पर सभी प्रत्याशियों के एजेंटों से किए जाने वाले मॉक पोल और मतदाताओं से किए गए मतदान को लेकर थी.

अब ऐसे होगा इसका निदान

उपजिला निर्वाचन अधिकारी पीडी गुप्त ने बताया कि अयोध्या के तीन और गोसाईगंज के एक बूथ पर ईवीएम में वोटों की संख्या, वोट डालने आए मतदाताओं की संख्या से ज्यादा मिले हैं. बताया कि इन चार बूथों के ईवीएम के वोटों का मिलान भी इसके वीवीपैट की पर्चियों से कराया जाएगा.

पीठासीन अधिकारी से मॉक पोल कराए गए प्रत्याशी वार वोटों का आंकड़ा मौजूद है. ईवीएम और वीवीपैट की पर्ची से मिलान के बाद मॉक पोल के वोट को प्रत्याशी वार उसमें से घटा दिया जाएगा. इससे मतदाताओं से डाले गए वोटों को वास्तविक आंकड़ा सामने आ जाएगा.

यह है आयोग की व्यवस्था

नियमों के अनुसार बूथ पर तैनात पीठासीन अधिकारी को प्रत्येक एजेंट से कराए गए मॉक पोल और उसके द्वारा प्रत्याशियों को दिए गए वोट की संख्या लिखनी चाहिए. मॉकपोल में एजेंट से 50 वोट तक दिए जा सकते हैं. सभी एजेटों से मॉक पोल के बाद इसकी पूरी रिपोर्ट किस प्रत्याशी को कितने वोट डाले गए.

इसका ब्योरा लिखकर एजेंटों से इस बात की पुष्टि कराई जाती है कि मशीन सही ढंग से काम कर रही है. जिस प्रत्याशी को वोट दिया जा रहा है. उसी को मिल रहा है. इसके बाद पीठासीन अधिकारी की यह जिम्मेदारी होती है कि वह मॉक पोल के सभी वोट को ईवीएम से क्लीन (सफाई) कर दे.

इसके बाद मतदाताओं से वोट डलवाए जाएं. अन्यथा मॉक पोल के वोट भी ईवीएम में बने रहेंगे और अंत में ईवीएम का आंकड़ा मतदाताओं से डाले गए वोटों के आंकड़े से ज्यादा दिखाई पड़ेगा. यही स्थिति इन चार बूथों की भी बताई जा रही है. मतदान कार्मिकों को दो चक्रों के प्रशिक्षण के बावजूद सही प्रशिक्षण न प्राप्त करने के कारण प्रशासन के सामने यह मुश्किल खड़ी हो गई है.

25 के बजाए अब 29 बूथों पर होगा वीवीपैट से वोटों का मिलान

पीठासीन अधिकारियों की इस चूक के चलते अब जिले में पहले से तय 25 बूथों के बजाए चार और बूथ बढ़कर 29 बूथों की ईवीएम और वीवीपैट की पर्चियों से वोट का मिलान कराना पड़ेगा. आयोग के आदेश के मुताबिक प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के पांच-पांच बूथों पर डाले गए वोटों को वीवीपैट से मिलान किए जाने की व्यवस्था है. लेकिन दो विधानसभा क्षेत्रों के बूथों पर सामने आई खामी के चलते अब 29 बूथों पर वोटों का वीवीपैट से मिलान कराया जाएगा.

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