अब नीले -काले रंग की होगी गेंहू आटा की रोटी, जाने क्या फायदे है इस रोटी की?

एक स्टडी में पता चला है कि काला गेहूं शरीर में वसा जमाव को रोकने में मदद कर सकता है, ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित कर सकता है, इंसुलिन सहिष्णुता और निम्न रक्त कोलेस्ट्रॉल में सुधार कर सकता है।

भारतीय वैज्ञानिकों का कमाल, खेतों में लहलहाएंगे ब्लू एवं पर्पल गेहूं

जल्द ही आपको मिलेगी ब्लू रोटी, डायबिटीज से लेकर कैंसर रोगियों के लिए है लाभदायक…

अब तक आप रोटी में केवल गेहूं की सफेद रोटी ही खातेहैं। जबकि ब्रेड में आमतौर पर व्हाइट और ब्राउन ब्रेडलोगों को खाने को मिलती है। लेकिन अब जल्द ही आपको ब्लू, पर्पल और ब्लैक ब्रेड भी खाने को मिलेंगी। अलग-अलग कलर के अलावा इनके अलग हेल्थ बेनेफिट्स भी हैं। ये रंग बिरंगे कलर के ब्रेड जल्द ही आपको अपने आसपास के स्टोर्स में मिल सकते हैं।लोगों को केवल कलरफुर ब्रेड ही नहीं बल्कि बिस्कुट, सुजी, और सिंगापुर की ही तरह पर्पल नुडल्स भी खाने को मिलेगा। मोहाली में राष्ट्रीय कृषि-खाद्य जैव प्रौद्योगिकी संस्थान National Agri-Food Biotechnology Institute(NABI) में मोनिका गर्ग के नेतृत्व में कृषि जैव प्रौद्योगिकीविदों ने न केवल इन रंगीन गेहूं किस्मों को विकसित किया है, बल्कि विभिन्न कंपनियों को भी इस टेक्नोलॉजी को दिया है।

काले गेहूं में सामान्य गेहूं की तुलना में 28 गुना एन्थोकायनिन

बिजनेस लाइन अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि NABI के साथ जिन भी कंपनियों ने एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं उन्होंने इन रंगीन गेंहू की खेती शुरू कर दी है। लगभग एक दशक से इसपर काम कर रही मोनिका गर्ग ने कहा, हमने इसे अभी व्यक्तिगत किसानों के लिए जारी नहीं किया है क्योंकि उन्हें इसे बेचने में काफी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। पूरी दुनिया में उगने वाले अलग-अलग वैरायटी के गेहूं का रंग सफेद होता है। जबकि कुछ को ब्लूबेरी, ब्लैकबेरी और जामुन जैसे फलों में मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट से अपना रंग मिलता है। मोनिका गर्ग ने बताया कि सामान्य गेहूं की किस्मों में एंथोसायनिन कम होता है, जबकि रंगीन गेहूं की किस्मों में यह ज्यादा होता है। उदाहरण के लिए काले गेहूं में सामान्य गेहूं की तुलना में 28 गुना एन्थोकायनिन होता है।

रंगीन गेहूं के हैं कई हेल्थ बेनेफिट्स..

गेहूं की इन रंगीन किस्मों में कई तरह के हेल्थ बेनेफिट्स होते हैं। NABI की एक स्टडी में पता चला है कि काला गेहूं शरीर में वसा जमाव को रोकने में मदद कर सकता है, ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित कर सकता है, इंसुलिन सहिष्णुता और निम्न रक्त कोलेस्ट्रॉल में सुधार कर सकता है। इसमें एन्थोकायनिन होने के अलावा प्रोटीन और जिंक भी काफी अधिक स्तर पर होता है। इस गेहूं का उपयोग कैंसर रोगियों के लिए सकारात्मक डायट के रूप में सफल पाया गया है। भोजन के तौर पर यह बेहतर विकल्प के रूप में सामने आया है। वहीं डायबिटीज रोगियों में काले गेहूं के उपयोग से सकारात्मक परिणाम सामने आये हैं। साथ ही हृदय रोगियों पर किये शोध में भी काला गेहूं का सार्थक परिणाम मिला है।

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