योगी रामराज का अँधा क़ानून…पीड़िता ही कसूरवार !

अगर बीजेपी के एक विधायक पे रेप चार्ज प्रूफ हो जाते है तो मोदी का 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' नारा एक भद्दा मज़ाक़ बन कर रह जायेगा. इसीलिए केंद्र और राज्य दोनों सरकारें एड़ी चोटी की ज़ोर लगा कर अपने विधायक को बचा कर रहेंगे.

उन्नाव की चर्चित बलात्कार केस में एक नया मोड़ आ गया है. अब पुलिस ने पीड़िता और उसके परिवार के ख़िलाफ़ ही धोखाधड़ी का केस दर्ज़ किया है. पुलिस ने ये क़दम बलात्कार के आरोपी सुभम के काउंटर एफआईआर के बाद उठाया है. पुलिस के इस क़दम ने क़ानून का मज़ाक़ बना कर रख दिया है. पुलिस के मुताबिक पीड़िता ने अपने नाबालिग होने का जो स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट पेश किया था, वह जाली था. पुलिस का ये खुलासा कई सवालो को जन्म देती है. पुलिसिया जांच पे सवालिया निशान लगाती है.पीड़िता और उसके परिवार को डराने धमकाने को संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी उत्तर प्रदेश को नोटिस भेजा है.

Beti Bachao Beti Padaoज्ञात हो कि बलात्कार केस में क़सूरवार को सज़ा दिलवाना सरकार का ज़िम्मे होता है. इसमें पीड़िता के तरफ से सरकारी वकील केस को लड़ता है. पुलिस और सरकारी वकील के कन्धों पे पीड़िता को न्याय दिलाने कि भार होती है. फिर आखिर यहां किसकी इसारे पे पुलिस उल्टा गंगा बहा रही है. आरोपी को बचा रही है और उल्टा पीड़िता को ही फंसा रही है. पीड़िता का नाबालिग होने या ना होने का जांच करना तो पुलिस का काम होता है तो फिर किस तरह से पुलिस पीड़िता के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी कि आरोप लगा सकती है.

अब आइये थोड़ा केस और विस्तार से समझते हैं.

फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट के समक्ष पीड़िता का बयान

सबसे पहले पीड़िता का बयान फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट के सामने होता है. यहां केस को मजिस्ट्रेट सुनता है और ये भी देखा जाता है कि पीड़िता नाबालिग है या बालिग़.अगर नाबालिग है तो पोक्सो के तहत केस चलता है. तो फिर चूक कैसे हुई.

बलात्कार के पुष्टि के लिए मेडिकल जांच

मेडिकल जांच से रेप हुआ है या नहीं सुनिश्चित करते हैं. इस जांच से आरोपी के ख़िलाफ़ सीमेन आदि साक्ष्य जुटाए जाते हैं. मेडिकल जांच में भी डॉक्टर उम्र का पता लगा सकते हैं, कम से कम अंदाज़ा तो लगा ही सकते हैं. पुलिस के इस क़दम से डॉक्टर के भी जांच में सवाल खड़े करते हैं .
आखिर में सर्टिफिकेट को जांच कर एडमिट करने का काम पुलिस का है.

अब सवाल उठता है कि पीड़िता को बालिग़ साबित हो जाने से क्या होगा?

ऐसा होने से पूरा केस ही पलट जायेगा. अब बलात्कारियों पे POCSO क़ानून नहीं लगेगा. जिस से सज़ा में थोड़ा ढील हो जायेगा. अगर धोखाधड़ी भी साबित हो जाती है तो डर है कि कहीं पीड़िता को ही ना सज़ा हो जाये.

अंत में

अगर बीजेपी के एक विधायक पे रेप (बलात्कार) चार्ज प्रूफ हो जाते है तो मोदी का ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ नारा एक भद्दा मज़ाक़ बन कर रह जायेगा. इसीलिए केंद्र और राज्य दोनों सरकारें एड़ी चोटी की ज़ोर लगा कर अपने विधायक को बचा कर रहेंगे. और अभी योगी के रामराज में ये हालात है कि पुलिस एक विधायक को बचाने के लिए उल्टा पीड़िता को ये ना साबित कर दे कि पीड़िता ने ही विधायक का बलात्कार किया था !!!

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