क्यों बुलंदशहर में बहादुर इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या हुई ?

एक बार फिर से ख़ूनी भीड़ ने बुलंदशहर में एक जांबाज़ पुलिस को गोली मारकर बेरहमी से क़त्ल कर दिया गया. इस केस में कौन, कहाँ और कब से ज़्यादा महत्वपूर्ण है, यह घटना आखिर क्यों हुआ? यह साज़िश किस लिए था? और आखिर इसका मक़सद क्या था? इस सोची- समझी, पूर्व नियोजित षड़यंत्र से आखिर क्या हासिल करना था?
अभी चूँकि इस केस की जांच एस आई टी कर रही है इसीलिए कुछ भी निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगी. इस केस से जुड़े लोगो के बयान किसी बड़े षड़यंत्र की ओर इशारा करता है.

सुबोध कुमार सिंह की बहन सुनीता सिंह का आरोप

“मेरा भाई पुलिस के षंडयंत्र के कारण मारा गया क्योंकि वह दादरी के गोहत्या मामले की जांच कर रहे थे.” उन्होंने आगे पूछा कि मुख्यमंत्री गाय – गाय रटते रहते हैं; आखिर वे गोरक्षा के लिए क्यों नहीं आते हैं?

सुबोध कुमार सिंह के पुत्र का बयान

” मेरे पिता मुझे एक अच्छा नागरिक बनाना चाहते थे, जो समाज में धर्म के नाम पर हिंसा को न बढ़ावा दे.” उसने आगे कहा ‘मेरे पिता को पहले भी नवंबर 2015 में भी धमकी भरे फोन कॉल्स आते थे, वो तब दादरी के अख़लाक़ मर्डर केस की जांच कर रहे थे. मेरे पिता ने हिन्दू- मुसलिम विवाद के चलते जान गवां दी, अब किसके पिता की बारी है?’

सुबोध कुमार सिंह के ड्राइवर का आधिकारिक बयान

बेकाबू भीड़ ने पुलिस को घेर लिया था. सुबोध कुमार को भीड़ ने पत्थर मारकर घायल दिया. और मैंने बहुत कोशिश किया सर को लेकर भागने की लेकिन जब नहीं बचा पाए तब अपनी जान बचाने को वहां से भाग गया.

राज्य सरकार ने गोकसी के जांच का निर्देश दिया लेकिन शहीद इंस्पेक्टर के शोक में एक शब्द भी नहीं कहा. स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि स्थानीय संसद और बीजेपी के आला नेता शहीद इंस्पेक्टर पर ही आरोप लगा रहें हैं. उनके अनुसार इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह हिन्दुओं के धार्मिक कर्मकांड पे विध्न डालते थे.

इस केस के कुछ अनसुलझे सवालात:

शहीद इंस्पेक्टर को गोली लगने का स्थान और परिस्थिति

आखिर किस तरह इंस्पेक्टर की जीप चारो ओर से बंद खेत में पहुंची. क्योंकि जब किसी को खतरा होगा तो खुले में भागने का कोशिश करेगा न कि किसी बंद जगह में फंसने जायेगा. और एक वायरल वीडियो में साफ़ सुना जा सकता है कि गोली मारने वाले इंस्पेक्टर की पहचान करके गोली मार रहें हैं. वो लोग इंस्पेक्टर के मरने की पुष्टि भी किया. बड़ा सवाल यह है कि गोली काण्ड के समय साथी पुलिस वाले कहाँ थे? और उनके पास घटना के वक़्त उनकी पिस्तौल भी नहीं थी?

गोवंश का शव क्षत विक्षत लाश का मिलना

गोवंश के लाश को प्रथम दृष्ट्या देखने से ही लगता है कि जैसे इनका क़त्ल खाने के लिए नहीं बल्कि किसी और मक़सद से किया गया है. लाश का प्रधान के खेत में पाया जाना भी शक को और गहरा करता है. आखिर क्यों कोई जानवर को मारकर उसके सबूत को बाहर छोड़ेगा. वो भी तब, जब उसी समुदाय विशेष के मज़हबी जलसे का आयोजन हो रहा हो?

योगेश राज के फेसबुक टाइमलाइन पर आपत्ति जनक पोस्ट

पिछले दस पंद्रह दीनों योगेश राज के टाइमलाइन पर आपत्ति जनक वाले पोस्ट काफी पोस्ट हो रहे थे. कुछ पोस्ट में वो विशेष समुदाय के आयोजनों में हमला करने कि अपील करते नज़र आ रहें हैं. क्या समुदाय विशेष को फंसाने के लिए गोहत्या का खेल तो नहीं खेला गया था ?

अब हमें कुछ दिनों का और इंतज़ार करना होगा जब तक एस आई टी का रिपोर्ट ना आ जाए.

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